सोल्डरिंग क्या है? सोल्डर के प्रकार


क्या आप जानते हैं कि सोल्डरिंग क्या है? सोल्डरिंग कितने प्रकार की होती है? सोल्डरिंग का क्या उपयोग होता है?

इस पोस्ट में मैं आपको सोल्डरिंग के बारे में पूरी जानकारी देने वाला हूँ कि सोल्डरिंग क्या होता है और यह कैसे किया जाता है?

सोल्डरिंग क्या होता है?

दो या दो से अधिक धातुओं को, ऊष्मा प्रक्रिया द्वारा पिघली हुई फिलर धातु (सोल्डर) की सहायता से जोड़ने की क्रिया को सोल्डरिंग कहते हैं।

सोल्डरिंग कितने प्रकार की होती है?

नर्म सोल्डरिंग: इसका उपयोग किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की छोटी-छोटी युक्तियों के कनेक्शन के लिए किया जाता है। यह कम तापमान पर किया जाता है क्योंकि अधिक तापमान होने पर छोटी इलेक्ट्रॉनिक युक्तियों को नुकसान पहुँच सकता है। नर्म सोल्डरिंग करने के लिए सोल्डरिंग आयरन का उपयोग किया जाता है।

कठोर सोल्डरिंग: इसका उपयोग तांबा, पीतल और चांदी को जोड़ने के लिए किया जाता है। इसे सिल्वर सोल्डरिंग भी कहते हैं। इसका तापमान नर्म सोल्डरिंग से अधिक होता है। इसका जोड़ भी नर्म सोल्डरिंग से अधिक मजबूत होता है। कठोर सोल्डरिंग करने के लिए ब्लोटार्च का उपयोग किया जाता है।

सोल्डर क्या है?

सोल्डर एक गलनीय मिश्र धातु होती है जिसका उपयोग किन्ही दो धातुओं को स्थायी रूप से जोड़ने के लिए किया जाता है। सोल्डर का गलनांक उस धातु से काम होना चाहिए जिसको जोड़ना है। ताकि इसे आसानी से पिघला कर विभिन्न धातुओं को जोड़ा जा सके।

विभिन्न प्रकार की सोल्डरिंग के अनुसार उनमे प्रयुक्त होने वाला सोल्डर भी भिन्न होता है।

नर्म सोल्डर: यह टिन और लैड (सीसा) के मिश्रण से बनाया जाता है। इसका गलनांक कम होता है। नर्म सोल्डर का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जाता है।

कठोर सोल्डर: यह तांबा और जस्ता के मिश्रण से बनाया जाता है तथा इसका गलनांक नर्म सोल्डर से अधिक होता है। इसका उपयोग सिल्वर सोल्डरिंग में किया जाता है।

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