केप्लर का प्रथम, दूसरा, तीसरा नियम

भौतिक विज्ञान में विभिन्न प्रकार के नियम और सिद्धात आते है जैसे ओम का नियम, किरचॉफ का नियम, फैराडे के सिद्धांत आदि। यहाँ मैं आपको केप्लर का नियम बताने वाला हूँ।

केप्लर ने इन तीन नियमो के माध्यम से यह बताया है कि हमारे सूर्यमंडल के सभी गृह किस तरह से सूर्य की परिक्रमा करते हैं।

गति सदैव सापेक्ष होती है। गतियों को कण की ऊर्जा के आधार पर दो श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:

Bounded Motion: इसमें कण में में ऋणात्मक कुल ऊर्जा (E < 0) होती है और इसके दो या अधिक चरम बिंदु होते हैं। जहां कुल ऊर्जा हमेशा कण की संभावित ऊर्जा के बराबर होती है, अर्थात कण की गतिज ऊर्जा शून्य हो जाती है।

Unbounded Motion: इसमें कण की कुल सकारात्मक ऊर्जा (E > 0) होती है और इसका एक चरम बिंदु होता है जहां कुल ऊर्जा हमेशा कण की संभावित ऊर्जा के बराबर होती है, अर्थात कण की गतिज ऊर्जा शून्य हो जाती है।

केप्लर का प्रथम नियम

यह कक्षाओं का नियम होता है। इस नियम के अनुसार, सौरमंडल के प्रत्येक ग्रह की कक्षा सूर्य के चारों ओर एक दीर्घवृत्त के रूप में होती है। अर्थात गृह एक दीर्घवृत्ताकार पथ पर गति करता है।

अपने पथ पर गति करते हुए, किसी गृह की कक्षा का वह बिंदु जिस पर वह गृह सूर्य के सबसे निकट होता है उसे Perihelion (उपसौर) कहते हैं। और जिस बिंदु पर गृह, सूर्य से सबसे अधिक दूर होता है उसे Aphelion (अपसौर) कहते हैं।

इसी दीर्घवृत्ताकार पथ की वजह से ऋतुओं का निर्माण होता है।

केप्लर का दूसरा नियम

इस नियम के अनुसार किसी गृह को सूर्य से मिलाने वाली रेखा, समान समय अंतराल में समान क्षेत्रफल तय करती है।

अर्थात, जब कोई गृह सूर्य के बहुत करीब (Perihelion) पर होता है तो वह तेजी से गति करता है और जब वह सूर्य से अधिक दूर (Aphelion) पर होता है तो वह धीमे गति करता है।

केप्लर का दूसरा नियम

उदाहरण के लिए आप ऊपर दिए गए चित्र में देख सकते हैं कि जब कोई गृह सूर्य के निकट होता है तो वह समान समय में अधिक पथ तय कर लेता है और जब वह सूर्य से अधिक दूर होता है तो वह समान समय में कम पथ तय करता है। जिसकी वजह से लाल रंग के क्षेत्र और नीले रंग के क्षेत्र का क्षेत्रफल बराबर होगा। इस प्रकार आप इस नियम की परिभाषा को आसानी से समझ सकते हैं।

केप्लर का तीसरा नियम

इस नियम के अनुसार, किसी गृह द्वारा सूर्य की एक परिक्रमा करने में लगे समय (T) का वर्ग, उस गृह की कक्षा के अर्ध दीर्घ अक्ष (a) के घन के अनुक्रमानुपाती होता है।

अर्थात,

T2 ∝ a3

किसी गृह द्वारा सूर्य की परिक्रमा करने में लगा समय, उस गृह और सूर्य के बीच की दूरी पर निर्भर करता है।

न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के नियम और गति के नियमों के समीकरणों का उपयोग करने हम केप्लर के नियम को सामान्य बना सकते हैं।

P= 4π2 /[G(M1+ M2)] × a3


मैं आशा करता हूँ आपको ये जानकारी पसंद आयी होगी। इसे अपने दोस्तों से जरूर करें।

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